
स्थापना: 18 जुलाई 2008 उद्देश्यः
* महर्षि पाणिनी प्रणीत आर्ष पद्धति से ब्रह्मचारियों को शिक्षा प्रदान करना है जिससे वे समाज में वैदिक, आध्यात्मिक विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर सकें।
* विशिष्ट योग्यता वाले वैदिक दार्शनिक विद्वानों का निर्माण करना जो सार्वभौतिक युक्तियुक्त, अकाट्य, वैज्ञानिक एवं शाश्वत् वैदिक सिद्धान्तों का बुद्धिजीवी वर्ग के समक्ष प्रभावशाली ढंग से प्रतिपादन कर उनकी नास्तिकता को मिटा सके । निष्काम भावना से युक्त मनसा वाचा कर्मणा से एक होकर अपना सम्पूर्ण जीवन लगाने वाले व्यक्तियों का निर्माण करना जो अपनी और संसार की अविद्या, अधर्म तथा दुखः का विनाश कर विद्या, धर्म तथा सुख की स्थापना में अपना महत्वपूर्ण योगदान देवें ।
महर्षि दयानन्द द्वारा स्थापित गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति के विस्तार हेतु आर्य समाज के संरक्षक महोदय श्री बीरबल जी आर्य द्वारा समीपस्थ स्थित
ग्राम सोनाखार में चार एकड़ भूमि दान दी गई जिस पर सन् 2008 में महर्षि दयानन्द सरस्वती आर्ष गुरुकुल की स्थापना की गई जिसमें विभिन्न प्रदेशों से आए ब्रह्मचारियों को पूर्णतः निःशुल्क आवासीय व्यवस्था एवं वैदिक संस्कृति से ओत-प्रोत गुरुकुलीय शिक्षा आचार्य ओमदेव जी के सान्निध्य में प्रदान की जा रही है। गुरुकुलीय शिक्षा के साथ ही गौशाला का भी संचालन किया जा रहा है जिसमें लगभग 30 गायों की व्यवस्था की गई है।
आर्य समाज की गतिविधियों एवं वैदिक विचारधारा के प्रचार-प्रसार को और अधिक विस्तारित करने के उद्देश्य से अपना सम्पूर्ण जीवन लगाने वाले संरक्षक श्री भुवन जी आर्य द्वारा बालक गुरुकुल की स्थापना हेतु समीपस्थ ग्राम मेघासिवनी में 5 एकड़ जमीन दान दी गई जिस पर निकट भविष्य में लगभग 100ब्रह्मचारियों की आवासीय एवं शिक्षण की व्यवस्था होगी
महर्षि दयानन्द सरस्वती से सम्बन्धित वैदिक पुस्तकों का उपलब्ध कराना
पुस्तकालय – स्वामी दयानन्द जी से संबंधित योग एवं पठन-पाठन से संबंधित पुस्तकें-स्त्यार्थ प्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, उपदेश मंजरी, आत्म कथा, योगा दर्शनम्, सरल योग से ईश्वर साक्षात्कार, बह्य विज्ञान, योगमीमांसा, अध्यात्म सरोवर, तत्व-ज्ञान, क्रियात्मक योगाभ्यास, ईश्वर सिद्धि, आर्यों के सोलह संस्कार,संस्कार विधि, व्यवहार भानु, चारों
दान हेतु अपील
| उपरोक्त समस्त गतिविधियों का सफलतापूर्वक संचालन समस्त आर्यजनों के सहयोग के बगैर सम्भव | नहीं है। इसलिए सभी से अनुरोध है कि इस महा-अभियान में यथाशाक्ति अपना आर्थिक सहयोग | प्रदान कर पुण्य लाभ कमावें ।
| आपके द्वारा दानस्वरुप दी गई सामग्री अथवा धनराधि की पावती अवश्य लेवें । दानस्वरुप धनराशि | आप “महर्षि दयानन्द सरस्वती आर्य गुरुकुल सोनाखार” के नाम चैक, | बैंक ड्राफ्ट द्वारा अथवा गुरुकुल के खाता क्रमांक 83000100172820 (पंजाब नेशनल बैंक, (मुख्य शाखा छिन्दवाड़ा) में भी भेज सकते हैं।
गुरुकुल की दिनचर्या
जागरण
–
04.00-04.10
श्रमदान
04.00-05.00
शौच दन्तधावन –
04.30-05.00
खेल
05.00-06.00
व्यायाम
–
05.00-06.00
यज्ञ संध्या
06.00-06.45
संध्या-यज्ञ –
06.00-07.15
रात्रि भोजन-
06.45-07.30
प्रातराश
–
07.15-08.00
भ्रमण
07.30-07.45
विद्यालय
08.00-12.20
स्वाध्याय
–
07.45-08.45
मध्याह्न भोजन- 12.30-10.00
दुग्धपान व मंत्रपाठ – 08.45 09.00
विश्राम
01.00-01.30
रात्रिशयन
–
09.00-04.00
विद्यालय
01.30-04.00
संपर्क सूत्र – 9407012142.7509430663
